Muflisi... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - जुलाई 28, 2009 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Arghwan21 अप्रैल 2010 को 7:22 pm बजेpainful truthजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com26 अप्रैल 2010 को 8:50 pm बजेyeah! is'nt it..... aur hum phir bhi is'se bekhabar ya yu kaho sab kuch jaante hue bhi andekha karte hain.....thanks for sharing your comment...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता.... और पढ़ें
अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... - सितंबर 13, 2011 जिसे तुम मंजिल कहते हो... वो तो सिर्फ एक पडाव हैं.... कई हैं सफ़र फेरहिस्त में... अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... आलोक मेहता... और पढ़ें
हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... - जुलाई 24, 2012 एक बार लिखा था किसी के लिए कभी..... "ख्वाबो ख्यालो में हसीं खूब लगता था... बहुत आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा..." मगर अब तुमसे मिल कर कहता हूँ.... "हर बार मिल कर इसके माने बदल देते हो.... हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... " ...आलोक मेहता.... और पढ़ें
painful truth
जवाब देंहटाएंyeah! is'nt it..... aur hum phir bhi is'se bekhabar ya yu kaho sab kuch jaante hue bhi andekha karte hain.....
जवाब देंहटाएंthanks for sharing your comment...