मैं दिल ही दिल नम रहा, शायद गुनाह हो गया
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अब क्या कहू यार की ये क्या हो गया
क्या हुई वजह जो वो बेवफा हो गया
हज़ार ही बातें मेरी... नापसंद है उसे
जाने आज किस बात वो खफा हो गया
जुदा हैं वो अब... मगर ये भी करम रहा
खामोशी खामोशी ही मैं रुसवा हो गया
वो रोया तो अश्को को पलकों पर संभाला मैंने
मैं दिल ही दिल नम रहा, शायद गुनाह हो गया
अब कोई सूरत न रही कि मिल जाऊ उस से मैं
लगता हैं आज सच में मुझसे वो जुदा हो गया
उसने मुड़कर कब देखा.. जो कोई बचा रहता
फिर मिलने का हर अरमान अब फना हो गया
... आलोक मेहता...
क्या हुई वजह जो वो बेवफा हो गया
हज़ार ही बातें मेरी... नापसंद है उसे
जाने आज किस बात वो खफा हो गया
जुदा हैं वो अब... मगर ये भी करम रहा
खामोशी खामोशी ही मैं रुसवा हो गया
वो रोया तो अश्को को पलकों पर संभाला मैंने
मैं दिल ही दिल नम रहा, शायद गुनाह हो गया
अब कोई सूरत न रही कि मिल जाऊ उस से मैं
लगता हैं आज सच में मुझसे वो जुदा हो गया
उसने मुड़कर कब देखा.. जो कोई बचा रहता
फिर मिलने का हर अरमान अब फना हो गया
... आलोक मेहता...
bahut achha likha hai Aalok bhai ..
जवाब देंहटाएंachhha laga padh ke ..
[:)]
bahut bahut shukriya aditya...
जवाब देंहटाएंnice blog
जवाब देंहटाएंthanks Blog Joker....
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