कि होता हैं क्या इश्क.... इक नजर बता देना

मुझे में नहीं बाकी कोई
शायद तुझमे बचा हो
टटोल जरा गिरह अपनी
देख कही छुपा हो
पोशीदा कही गर हो
जरा मुझसे मिला देना
होता हैं क्या इश्क
इक नजर बता देना
अरसा बीता इक
वो पल अब तक न बीता
तू नहीं गया अब तक
हर लम्हा पड़ा फीका
गर कही मिल जाए तू
पहले सा, मुझे दिखा देना
कि होता हैं क्या इश्क
इक नजर बता देना
.. आलोक मेहता...
sablog apni bhavnayon ko shabdo ka roop nahi de pate hain...tumhare kavitayon main shabd aur bhavnayon ka ek acha taal mel hai...so keep it up dear all the best....
जवाब देंहटाएं@ Swetaji...
जवाब देंहटाएंBehad shukriya aapka... meri rachnaye pasand karne ke liye...
CLAPPING...
जवाब देंहटाएंBahut badhia...
shukriya.. Yogesh
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