जिस्म साथ हो तो.. दरमियान फासले नहीं होते...? लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - अगस्त 25, 2011 बज़ा फरमाया तूने की.. हम अब भी एक घर में साथ रहते हैं... मगर ये किसने कहा.. कि, जिस्म साथ हो तो.. दरमियान फासले नहीं होते... आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ आहुति26 अगस्त 2011 को 9:19 am बजेबहुत ही अच्छी पंक्तिया....जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com26 अगस्त 2011 को 11:48 am बजेShukriya... Sushma 'Aahuti' ji....जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंshephali30 अगस्त 2011 को 12:19 pm बजेबहत खूब कहाजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंबेनामी5 सितंबर 2011 को 10:26 am बजेwaah waahजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता.... और पढ़ें
अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... - सितंबर 13, 2011 जिसे तुम मंजिल कहते हो... वो तो सिर्फ एक पडाव हैं.... कई हैं सफ़र फेरहिस्त में... अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... आलोक मेहता... और पढ़ें
हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... - जुलाई 24, 2012 एक बार लिखा था किसी के लिए कभी..... "ख्वाबो ख्यालो में हसीं खूब लगता था... बहुत आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा..." मगर अब तुमसे मिल कर कहता हूँ.... "हर बार मिल कर इसके माने बदल देते हो.... हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... " ...आलोक मेहता.... और पढ़ें
बहुत ही अच्छी पंक्तिया....
जवाब देंहटाएंShukriya... Sushma 'Aahuti' ji....
जवाब देंहटाएंबहत खूब कहा
जवाब देंहटाएंwaah waah
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