पहचान वो उस एक अजनबी से मेरी...

याद हैं तेरा आना जिंदगी में मेरी...
फिर लौट जाना जिंदगी से मेरी....
हैं यकीं.. न हुआ हैं.. और न होगा..
करम बढ़ के कोई ..तिश्नगी से मेरी..
बनी रहती तो जिंदगी बन ही जाती...
पहचान वो उस एक अजनबी से मेरी...
..आलोक मेहता... 05.01.2012
बहुत सार्थक प्रस्तुति, आभार|
जवाब देंहटाएंसराहना के लिए आपका बेहद शुक्रिया...
जवाब देंहटाएंye shayari unki yaad dila jati hian
जवाब देंहटाएं