ek duje ki pehal ki arju, baat aur bigadti hain लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - जुलाई 23, 2009 aksar is tarah hi rishto mein duria badhti hainek duje ki pehal ki arju, baat aur bigadti hain....Alok mehta... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Yogi25 जुलाई 2009 को 10:22 pm बजेWow alok !!Nice one !!जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com26 जुलाई 2009 को 12:33 pm बजेthank u very much...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता.... और पढ़ें
अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... - सितंबर 13, 2011 जिसे तुम मंजिल कहते हो... वो तो सिर्फ एक पडाव हैं.... कई हैं सफ़र फेरहिस्त में... अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... आलोक मेहता... और पढ़ें
हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... - जुलाई 24, 2012 एक बार लिखा था किसी के लिए कभी..... "ख्वाबो ख्यालो में हसीं खूब लगता था... बहुत आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा..." मगर अब तुमसे मिल कर कहता हूँ.... "हर बार मिल कर इसके माने बदल देते हो.... हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... " ...आलोक मेहता.... और पढ़ें
Wow alok !!
जवाब देंहटाएंNice one !!
thank u very much...
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