इक शख्स... घिसा-पिटा... पुराना सा... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - जून 09, 2011 तेरे बाद कुछ न रहा... इस जीस्त... पहचाना सा...बचा फकत इक शख्स... घिसा-पिटा... पुराना सा...आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ shephali14 जुलाई 2011 को 10:54 pm बजेkafi acha likhte hain aap bahut khubsoorat andaaz hai :)wrod verification hata dijiye it'll be easy to commentजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com16 जुलाई 2011 को 2:04 pm बजेShukriya Shephali ji....जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंRanveer singh22 जुलाई 2011 को 11:11 pm बजेyou are great poet mr alokजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com23 जुलाई 2011 को 2:18 pm बजेthanks a lot Ranveer ji..जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
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kafi acha likhte hain aap
जवाब देंहटाएंbahut khubsoorat andaaz hai :)
wrod verification hata dijiye it'll be easy to comment
Shukriya Shephali ji....
जवाब देंहटाएंyou are great poet mr alok
जवाब देंहटाएंthanks a lot Ranveer ji..
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