तो... दरमियान फासला न इतना ज्यादा होता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - अगस्त 25, 2011 क्या चाहता हूँ तुझसे.. गर... ज़रा भी मुझे अंदाजा होता... तो सच कहता हूँ... दरमियान फासला न इतना ज्यादा होता... आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ आहुति26 अगस्त 2011 को 9:18 am बजेबहुत ही अच्छी... जितने ही कम शब्द उतनी ही गहराई....जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com26 अगस्त 2011 को 6:55 pm बजेBehad Shukriyaa.... Sushma 'Aahuti' ji...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंshephali30 अगस्त 2011 को 12:18 pm बजेबहुत सोचा फिर ये जाना मैंनेतुझसे रिश्ता बस यूँ ही बनाया था शायदजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com30 अगस्त 2011 को 8:26 pm बजेहो जाते हैं कुछ रिश्ते बनकर बेमायने भी...कि हर राह को मंजिल मिले... जरुरी तो नहीं...shukriya shephali ji... :) aur acchi panktiya.... pasand aayi...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता.... और पढ़ें
अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... - सितंबर 13, 2011 जिसे तुम मंजिल कहते हो... वो तो सिर्फ एक पडाव हैं.... कई हैं सफ़र फेरहिस्त में... अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... आलोक मेहता... और पढ़ें
हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... - जुलाई 24, 2012 एक बार लिखा था किसी के लिए कभी..... "ख्वाबो ख्यालो में हसीं खूब लगता था... बहुत आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा..." मगर अब तुमसे मिल कर कहता हूँ.... "हर बार मिल कर इसके माने बदल देते हो.... हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... " ...आलोक मेहता.... और पढ़ें
बहुत ही अच्छी... जितने ही कम शब्द उतनी ही गहराई....
जवाब देंहटाएंBehad Shukriyaa.... Sushma 'Aahuti' ji...
जवाब देंहटाएंबहुत सोचा फिर ये जाना मैंने
जवाब देंहटाएंतुझसे रिश्ता बस यूँ ही बनाया था शायद
हो जाते हैं कुछ रिश्ते बनकर बेमायने भी...
जवाब देंहटाएंकि हर राह को मंजिल मिले... जरुरी तो नहीं...
shukriya shephali ji... :) aur acchi panktiya.... pasand aayi...