दुआ-सलाम कर लौटने का.... फिर न रस्ता रखना... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - फ़रवरी 06, 2012 यक-ब-यक ही जाना ..जब जाना तुम.. जिंदगी से मेरी...दुआ-सलाम कर लौटने का.... फिर न रस्ता रखना...आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Nidhi6 फ़रवरी 2012 को 4:55 pm बजेजब साथ ही छूट गया तो क्या रास्ता देखना ..पर फिर भी एक उम्मीद ना जाने क्यूँ रहती हैजवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com13 मार्च 2012 को 7:26 pm बजेusi ummeed k chalte to naye rishto mein wo gehraayi nahi aa paati... to behtar hain ki ummeed hi na rahe... aur dono hi nayi shuraat kar sake...हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंआहुति6 फ़रवरी 2012 को 9:16 pm बजे.बहुत खूब.....जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंनीरज गोस्वामी6 फ़रवरी 2012 को 10:48 pm बजेWAAH...LAJAB KAR DIYA AAPNEजवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com13 मार्च 2012 को 7:25 pm बजेAp sabhi ka behad behad shukriya....जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
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जब साथ ही छूट गया तो क्या रास्ता देखना ..पर फिर भी एक उम्मीद ना जाने क्यूँ रहती है
जवाब देंहटाएंusi ummeed k chalte to naye rishto mein wo gehraayi nahi aa paati... to behtar hain ki ummeed hi na rahe... aur dono hi nayi shuraat kar sake...
हटाएं.बहुत खूब.....
जवाब देंहटाएंWAAH...LAJAB KAR DIYA AAPNE
जवाब देंहटाएंAp sabhi ka behad behad shukriya....
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