रूह की रुसवाई तो होनी थी.. और बस होनी थी.... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - फ़रवरी 09, 2012 यूँ तो बदलता रहा... जिस्म लिबास दर लिबास...रूह की रुसवाई तो होनी थी.. और बस होनी थी....आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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