कभी बेधड़क दिल में घुस आये थे मेरे... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - अप्रैल 25, 2012 वो जो करते हैं अब.. हर बात का तकल्लुफ...कभी बेधड़क दिल में घुस आये थे मेरे...आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Sneha Rahul Choudhary26 अप्रैल 2012 को 5:44 pm बजेअल्फ़ाज़ोँ का ज़हीन होना आपकी लेखनी की सबसे बड़ी खासियत है जो आपकी शायरी को और भी ज्यादा खूबसूरत बना देती है बिल्कुल इस शायरी की तरह।जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com26 अप्रैल 2012 को 7:41 pm बजेइतने अच्छे लफ्जों के लिए बेहद बेहद शुक्रिया स्नेहा...जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंSonia30 अप्रैल 2012 को 12:18 pm बजेBahut sundar rachana hai:)Following you now.. Glad I discovered your blog:)जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंdeewan-e-alok.blogspot.com3 मई 2012 को 11:11 am बजेBehad shukriya Sonia ji... Thanks a lot for the words of appreciation and the pleasure is all mine.. :)जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता.... और पढ़ें
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अल्फ़ाज़ोँ का ज़हीन होना आपकी लेखनी की सबसे बड़ी खासियत है जो आपकी शायरी को और भी ज्यादा खूबसूरत बना देती है बिल्कुल इस शायरी की तरह।
जवाब देंहटाएंइतने अच्छे लफ्जों के लिए बेहद बेहद शुक्रिया स्नेहा...
जवाब देंहटाएंBahut sundar rachana hai:)
जवाब देंहटाएंFollowing you now.. Glad I discovered your blog:)
Behad shukriya Sonia ji... Thanks a lot for the words of appreciation and the pleasure is all mine.. :)
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