कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी....कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी...आलोक मेहता.... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Sneha Rahul Choudhary13 जुलाई 2012 को 6:50 pm बजेऔर आपका ये शेर है बेमिसाल भी:)जवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com17 जुलाई 2012 को 6:00 pm बजेBehad Shukriya...Sneha...हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंANULATA RAJ NAIR13 जुलाई 2012 को 11:17 pm बजेwaah....nice lines anuजवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com17 जुलाई 2012 को 6:00 pm बजेBehad Shurkiya.. Anu ji....हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंबेनामी9 जुलाई 2016 को 5:31 pm बजेलाजवाब आलोक जी जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंबेनामी9 जुलाई 2016 को 5:32 pm बजेलाजवाब आलोक जी जवाब देंहटाएंउत्तरजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... - सितंबर 13, 2011 जिसे तुम मंजिल कहते हो... वो तो सिर्फ एक पडाव हैं.... कई हैं सफ़र फेरहिस्त में... अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... आलोक मेहता... और पढ़ें
हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... - जुलाई 24, 2012 एक बार लिखा था किसी के लिए कभी..... "ख्वाबो ख्यालो में हसीं खूब लगता था... बहुत आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा..." मगर अब तुमसे मिल कर कहता हूँ.... "हर बार मिल कर इसके माने बदल देते हो.... हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... " ...आलोक मेहता.... और पढ़ें
और आपका ये शेर है बेमिसाल भी
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Behad Shukriya...Sneha...
हटाएंwaah....
जवाब देंहटाएंnice lines
anu
Behad Shurkiya.. Anu ji....
हटाएंलाजवाब आलोक जी
जवाब देंहटाएंलाजवाब आलोक जी
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