कि फकत एक लफ्ज़ थी ये "चाहत" तुझे जताने से पहले... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - अप्रैल 26, 2012 तुझसे मिल के मेरी जिंदगी में इसे माने मिले....कि फकत एक लफ्ज़ थी ये "चाहत" तुझे जताने से पहले...आलोक मेहता... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ Unknown26 अप्रैल 2012 को 9:10 pm बजेबहुत खूब!!जवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com27 अप्रैल 2012 को 3:49 pm बजेBehad shurkiya Kumaarji...हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंआहुति28 अप्रैल 2012 को 8:44 pm बजेwaah!...जवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com4 मई 2012 को 6:48 pm बजेthanks a lot sushmaहटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंArjun Dikshit12 मई 2012 को 7:35 pm बजेWaah bahut khoob!जवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com18 जून 2012 को 4:42 pm बजेशुक्रिया अर्जुन जी..हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंANULATA RAJ NAIR15 जून 2012 को 12:19 pm बजेbeautiful..............anuजवाब देंहटाएंउत्तरdeewan-e-alok.blogspot.com18 जून 2012 को 4:42 pm बजेThanks a lot... Anu ji...हटाएंउत्तरजवाब देंजवाब देंटिप्पणी जोड़ेंज़्यादा लोड करें... एक टिप्पणी भेजें
कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... - जुलाई 12, 2012 मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता.... और पढ़ें
अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... - सितंबर 13, 2011 जिसे तुम मंजिल कहते हो... वो तो सिर्फ एक पडाव हैं.... कई हैं सफ़र फेरहिस्त में... अभी तो मंजिले बेहिसाब हैं.... आलोक मेहता... और पढ़ें
हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... - जुलाई 24, 2012 एक बार लिखा था किसी के लिए कभी..... "ख्वाबो ख्यालो में हसीं खूब लगता था... बहुत आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा..." मगर अब तुमसे मिल कर कहता हूँ.... "हर बार मिल कर इसके माने बदल देते हो.... हसीं अब हसीं.. और हसीं ..... लगता हैं.... " ...आलोक मेहता.... और पढ़ें
बहुत खूब!!
जवाब देंहटाएंBehad shurkiya Kumaarji...
हटाएंwaah!...
जवाब देंहटाएंthanks a lot sushma
हटाएंWaah bahut khoob!
जवाब देंहटाएंशुक्रिया अर्जुन जी..
हटाएंbeautiful..............
जवाब देंहटाएंanu
Thanks a lot... Anu ji...
हटाएं