बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

Yu jaise..... kal hi ki baat ho…

कितना वक़्त हुआ... तुमसे मिले हुए..
मुद्दत सी.. लगती हैं..
फिर भी.. जेहन में ताज़ी हैं...
यूँ जैसे... कल ही की बात हो... नहीं...

तेरी मखमली उंगलियाँ हैं जैसे...
अब तक मेरे इन हाथो में...
किस तरह हौसला देते हुएं.. मेरी हथेलियों पर..
तेरी उंगलियों की पकड़ मजबूत हो जाया करती थी...
तेरी नजर अभी भी मेरे चेहरे पर ही..
कही ठहरी हुई हैं...
यही वजह हैं जो अब तक रोशन हूँ मैं..

जहाँ मिलते थे कभी हम...
वहां जाता हूँ ...तो तुम अक्सर मिल जाती हो..
मुझे छेडती...मुझसे अठखेलियाँ करती हुई..
देखता ही रह जाता हूँ शुन्य में अपलक...

जब कभी कहता हूँ "ठीक हूँ मैं " किसी के पूछने पर...
तुम जैसे कही से कह पड़ती हो.. "सच बताओ "
जब टहलता हूँ यूहीं जब राहो में..
तुम बहुत दूर तक साथ चलती हो मेरे...

और फिर वो चले भी जाना मेरे फैसले पर तेरा
आंसुओ को मुझसे छुपाते हुए
और मेरा कह पड़ना. "कि भूल जाना मुझे
क्यूकी मैं तुम्हे हरगिज़ याद ना रखूँगा "

उफ़... सच.. यकीं नहीं होता...
कितना वक़्त हुआ तुमसे मिले हुए...
मुद्दत सी बीती लगती हैं...
मगर फिर भी... जेहन में ताज़ा हैं
तू इस तरह...
यूँ लगता हैं... कल ही की बात हो...


...आलोक मेहता...






Kitna waqt hua tumse mile hue
Muddat si biti lagti hain..
Magar phir bhi.. jehan mein tazi hain
Yu jaise kal hi ki baat ho…
Tere makhmali ungliya hain jaise
Ab tak mere in haatho mein…
Kis tarah hausla dete hue… meri hathelio par
teri pakad majboot ho jaya karti thi…
Teri najar abhi bhi mere chehre
Pe kahi thehai hui hain..
Yahi wajah hain jo ab bhi roshan hu main…
Jaha milte the kabhi hum..
Waha jata hu… to tum aksar dikh jaati ho..
Mujhe chedti.. mujhse atkhelia karti hui….
Ji karta hain bus dekhta rahu apalak….
Jab kehta hu “main thik hu” kisi k puchne par
Tum jaise keh padti ho… sach bataao…
Jab tehalta hu yuhi jab raaho mein….
Tum bahut dur tak saath chalti ho yu hi….
Aur wo phir chale jaana mere faisle pe yu phir….
Ansuoo ko mujhse chupaate hue…
Aur mera keh padna… ki bhul jaana mujhe
Kyuki main tumhe hargiz yaad na rakhunga
Ufff….. Sach… yakin nahi hota….
Kitna waqt hua tumse mile hue…
Muddat si biti lagti hain…
Magar phir bhi… jehan mein taza hain tu is tarah…
Yu lagta hain.. kal ki hi baat ho….

…aalok Mehta…

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

पल बना रहा.. बात.... चलती रही..

चंद पलों का साथ था
चंद पलों की बात थी...
जिंदगी गुजर गयी...... पल बना रहा.. बात.... चलती रही...