कुछ बातें
कुछ बातें करनी थी यारो आपसे... मगर वो अक्सर होता हैं न कि जब बहुत कुछ कहना हो तो अक्सर कुछ भी नहीं कह पाते.. बस आज मेरी हालत कुछ ऐसी hi हैं... वजह? ये पता होता तो कम से कम यही बात करने का मसला होता.. मगर आज तो कुछ अजब hi ख़ामोशी छाई हैं... dil, जेहन हर सूं ... कही भी कुछ भी कहने को नहीं. बताने को नहीं... आपके साथ भी तो अक्सर ऐसा होता होगा न... होता हैं या नहीं... भई मेरे साथ तो ये कोई नयी बात नहीं... सुनने में अजीब लगता हैं न.... aap भी सोच रहे होंगे ... कि वाह जी वाह.. दावा तो हैं lekhak, shayar hone का और जब कुछ कहने का वक़्त आया तो चुप्पी लगा ली... ठीक हैं ठीक हैं... माना मेरी गलती हैं... मगर हूँ तो आखिर मैं भी इंसान hi न.. अरे दबे लबो में ये हसी कैसी... हाँ saahab इंसान hi हूँ मैं.. आपकी तरह... अब कुछ गलतिया तो मुझे भी जायज हैं.. नहीं... गर नहीं... तो गुजारिश हैं.. कि is दफा माफ़ी दे दी जाए मुझे... खैर चलिए .... आज इसी पर बात करते हैं.. ऐसा आपके साथ कितनी मर्तबा हुआ हैं कि aap कुछ कहना चाहते हैं और अचानक जुबा खुलने से इनकार कर देती हैं ऐसा लगता हैं.. कमबख्त लफ्ज़ जाने कौन से क...