सोमवार, 18 अप्रैल 2011

कुछ बातें

कुछ बातें करनी थी यारो आपसे... मगर वो अक्सर होता हैं न कि जब बहुत कुछ कहना हो तो अक्सर कुछ भी नहीं कह पाते.. बस आज मेरी हालत कुछ ऐसी hi हैं... वजह? ये पता होता तो कम से कम यही बात करने का मसला होता.. मगर आज तो कुछ अजब hi ख़ामोशी छाई हैं... dil, जेहन हर सूं ... कही भी कुछ भी कहने को नहीं. बताने को नहीं... आपके साथ भी तो अक्सर ऐसा होता होगा न... होता हैं या नहीं... भई मेरे साथ तो ये कोई नयी बात नहीं... सुनने में अजीब लगता हैं न.... aap भी सोच रहे होंगे ... कि वाह जी वाह.. दावा तो हैं lekhak, shayar hone का और जब कुछ कहने का वक़्त आया तो चुप्पी लगा ली... ठीक हैं ठीक हैं... माना मेरी गलती हैं... मगर हूँ तो आखिर मैं भी इंसान hi न.. अरे दबे लबो में ये हसी कैसी... हाँ saahab इंसान hi हूँ मैं.. आपकी तरह... अब कुछ गलतिया तो मुझे भी जायज हैं.. नहीं... गर नहीं... तो गुजारिश हैं.. कि is दफा माफ़ी दे दी जाए मुझे...

खैर चलिए .... आज इसी पर बात करते हैं.. ऐसा आपके साथ कितनी मर्तबा हुआ हैं कि aap कुछ कहना चाहते हैं और अचानक जुबा खुलने से इनकार कर देती हैं ऐसा लगता हैं.. कमबख्त लफ्ज़ जाने कौन से कोने में जाकर छुप गए हैं..

अजी कहा खो गए जनाब... गिनना मुश्किल हैं न... याद हैं वो उनसे पहले इकरार के पल... उनके सामने जाने से पहले वो बड़े बड़े दावे करना यारो k सामने... और फिर वही हालत हो जाना जैसा कि जगजीत साहब और आशा भोंसले जी फरमाते हैं... "जब सामने वो aa जाते हैं..क्या janiye क्या हो जाता हैं..." .. हँसी aa रही हैं न.. खुद कि हालत याद कर... मुझे भी.... आखिर मैं भी तो aap में से hi एक हु... खैर ये तो बहुत सारे उन पलों ka का एक हिस्सा भर हैं... ऐसे hi कितनी बार होता हैं... जब किसी प्यारे दोस्त को मानना होता हैं... तब भी यही हाल होता हैं.... या फिर याद हैं वो सफलता का पल.. जब सबकी निग़ाहे होती हैं आपकी तरफ... कुछ सुनने को आपसे.. और ख़ुशी के मारे गला रुंध सा जाता हैं... या फिर मेरे शादीशुदा मित्रो के लिए.. जब देवी जी कि कोई नयी फरमाइश आती हैं... कुछ कहते नहीं बनता ... ऐसा hi कुछ आजकल hamare प्रिय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी k साथ भी बहुत हो रहा हैं..आये दिन कोई न कोइ ऐसी घडी aa hi जाती हैं... वो बहुत कुछ कहना चाहते हैं... मगर कुछ कह नहीं पाते... गठबंधन k धर्म के हाथो तो कभी राजनीति का तजुर्बा न hone कि आड़ लेकर चुप्पी साध जाते हैं...

खैर जिंदगी में बहुत से ऐसे मौके आते हैं जब is कशमकश से हम सभी को गुजरना होता हैं...


कि अजब ये कशमकश के हालत होते हैं यारो
न कुछ कहते बनता हैं.. न चुप रहते बनता हैं...

अब is गुफ्तगू को यही विराम देते हैं.... फिर मिलेंगे कभी... जब ये जुबा और जज़्बात दोनों काबू में होंगे....


शब्बा खैर....

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