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Just two lines to take your heart away... लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बता घाटा क्या हैं... [two liner]

ठहाकों के बाद महफ़िल में ये भरा सन्नाटा क्या हैं... मैं भी हंसू जो तेरे साथ खुद पे... बता घाटा क्या हैं... ...आलोक मेहता...

कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी...

मसरूफियत भी हैं.. और तेरा ख्याल भी.... कुछ अपनी फितरत... कुछ तेरा कमाल भी... आलोक मेहता....

कि फकत एक लफ्ज़ थी ये "चाहत" तुझे जताने से पहले...

तुझसे मिल के मेरी जिंदगी में इसे माने मिले.... कि फकत एक लफ्ज़ थी ये "चाहत" तुझे जताने से पहले... आलोक मेहता...

अब जहीन हैं हम.. तो एक शिकवे पे याराने टूट जाते हैं...

छुटपन में नादाँ थे जब तक...लड़ते थे फिर मिल जाते थे... अब जहीन हैं हम.. तो एक शिकवे पे याराने टूट जाते हैं... आलोक मेहता... August 20, 2008

कभी बेधड़क दिल में घुस आये थे मेरे...

वो जो करते हैं अब.. हर बात का तकल्लुफ... कभी बेधड़क दिल में घुस आये थे मेरे... आलोक मेहता...

एक बार मिली... ताउम्र..तिश्नगी रही...

तौबा इक निगाह इस कदर बुरी रही.. एक बार मिली... ताउम्र..तिश्नगी रही... आलोक मेहता...

लम्हा जो भी गुजरा.. बेहद खूब गुजरा....

वक़्त गुजरा भी तो क्या खूब गुजरा... कर सारे ही ख्वाब मंसूब गुजरा.... और क्या कहे क्या रही सोहबत तुम्हारी.... लम्हा जो भी गुजरा.. बेहद खूब गुजरा.... आलोक मेहता...

हर पल हैं उम्मीद... हर लम्हा एक 'काश' हैं..

जीवन एक निरंतर सफ़र .. एक तलाश हैं. हर पल हैं उम्मीद... हर लम्हा एक 'काश' हैं.. ..आलोक मेहता...

रिश्ते ये नरमियों वाले...

तल्खी पे ख़त्म क्यों होते हैं.. रिश्ते ये नरमियों वाले... आलोक मेहता...

रूह की रुसवाई तो होनी थी.. और बस होनी थी....

यूँ तो बदलता रहा... जिस्म लिबास दर लिबास... रूह की रुसवाई तो होनी थी.. और बस होनी थी.... आलोक मेहता...

जब नहीं था तब भी.. और जब था तब भी...

हर सिम्त जिंदगी मुझे उसकी ही तलाश रही... जब नहीं था तब भी.. और जब था तब भी... आलोक मेहता...

फिर क्यों न याद रहा कुछ बेवफाई के सिवा....

और भी बहुत था रिश्ते में.. बेवफाई के सिवा..... फिर क्यों न याद रहा कुछ बेवफाई के सिवा.... ...आलोक मेहता...

जो लबो पे आ नहीं सकते.. जेहन से जा नहीं सकते...

रिश्ते के अपने माने.. सवाल.. बस .. चंद सवाल ही हैं... जो लबो पे आ नहीं सकते.. जेहन से जा नहीं सकते... आलोक मेहता...

दिल को कितनी उम्मीद थी तेरे लौट आने की...

दिल को कितनी उम्मीद थी तेरे लौट आने की... हुआ एहसास.. जब कोई सूरत ना रही.. तुझे लौटाने की... ..आलोक मेहता...

two liners - पसंदीदा शागिर्द को ही देता हैं... उस्ताद कड़े सबक....

पसंदीदा शागिर्द को ही देता हैं... उस्ताद कड़े सबक.... यही सोच... खुदा, तेरा हर इम्तिहान दिए जा रहा हूँ मैं... आलोक मेहता...

जिस सिम्त.. जिंदगी तुझसे जुड़ी..

मीलों लम्बा सफ़र... चंद ही कदमो में सिमट गया.. जिस सिम्त.. जिंदगी तुझसे जुड़ी... आसान हो गयी... आलोक मेहता... 10.01.2012

ढके जो बादल.. तो क्या आसमा नहीं??

ना सही तू मेरी दुनिया.. मेरी दास्तान जाहिर माना तेरा निशा नहीं... मगर न दिखे तो सूरज नहीं.. ढके जो बादल.. तो क्या आसमा नहीं?? ...आलोक मेहता...

एक पल नहीं लगता

अरसा लग जाता हैं उनसे मिलने में जिनसे मिलने में एक पल नहीं लगता... ...आलोक मेहता..

चोट फिर भी बेहद गहरी.. लगी हैं मुझको...

तेरा पत्थर चूक गया .. यूँ तो.. मेरे सर का निशाना.... ग़म न कर... चोट फिर भी बेहद गहरी.. लगी हैं मुझको... ..आलोक मेहता... from old creations... [17.10.2008]

जो कहने थे.. पर नहीं कहे तूने....

दर्द सिर्फ उन लफ्जों का नहीं...जो तेरे लबो से निकले... टीस उन अल्फाजो की भी बहुत हैं.. जो कहने थे.. पर नहीं कहे तूने.... ...आलोक मेहता...