गुरुवार, 10 नवंबर 2011

जो कहने थे.. पर नहीं कहे तूने....

दर्द सिर्फ उन लफ्जों का नहीं...जो तेरे लबो से निकले...
टीस उन अल्फाजो की भी बहुत हैं.. जो कहने थे.. पर नहीं कहे तूने....


...आलोक मेहता...

2 टिप्‍पणियां:

  1. कभी कभी कुछ बातें अनकही ही अच्छी होती हैं

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  2. हाँ ... और कुछ बातों को कह जाना ही बेहतर.. :)

    शुक्रिया शेफाली जी...

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