शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

चल आलोक चल इश्क लड़ाए

चल आलोक चल इश्क लड़ाए
प्यार की कुछ हम पींग बढाए
कि कब तक यु ही छड़ा रहेगा
तन्हा मुंह औंधे पड़ा रहेगा
चल कर जतन तन्हाई मिटाए
चल आलोक चल इश्क लड़ाए


ढूंढे कोई कन्या जो तुझपे रीझे
सपनो के तुझ संग बीज जो बीजे
बात मन की किसी कन्या को चल दिए बताये
चल आलोक चल इश्क लड़ाए

कोल्हू के बैल सा काम में जुटा हैं
मन का सकल देख संसार लुटा हैं
काम काम कर काहे सगरे दिन बिताये
चल आलोक चल इश्क लड़ाए

रात रात जग तारे गिनता हैं
दिन में सोता सपने चुनता हैं
रात दिन में टोटल कन्फुजियाये
चल आलोक चल इश्क लड़ाए

बहुत हुआ अब ये रोना धोना
छोड़ अँधेरे मन का ये कोना
ख़ुशी ख़ुशी दो बोल ले बतियाये
चल आलोक, चल न,,, इश्क लड़ाए...

... आलोक मेहता..

शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

परवाज उसे ही मिलती हैं जो कटी पतंग बदलता हैं

कुछ लोग जब मिलते हैं तो मौसम रंग बदलता हैं
सूरज पश्चिम से निकलता हैं अपने ढंग बदलता हैं

दिशाए बदल जाती हैं एक मोड़ से इन राहो की
सफ़र बदल जाता हैं जब राही "संग" बदलता हैं

भूख लाचारी के मुद्दे तज जब फिजूल बातें करते हैं
देश बदल जाते हैं जब हुक्मरान जंग बदलता हैं

सपनो के फुग्गे* फूटे जो ऐ दिल तू उनका मोह न कर
परवाज उसे ही मिलती हैं जो कटी पतंग बदलता हैं

सोने चांदी में न तोल बंदगी खुदा की "आलोक"
प्यार की निगाह एक पर, वो मलंग बदलता हैं

... आलोक मेहता..


*फुग्गे = गुब्बारे

सोमवार, 14 सितंबर 2009

ख्वाहिशो के मुताबिक ऐ दिल अब हौसला करना

Image Courtesy : Google Images


औरो से नहीं खुद से ही आगे बढ़ना होगा
सफ़र ये मुकम्मल कर गुजरना होगा
हालात लाख दुश्वार रहे हैं माजी में माना
शिकस्त से नयी राह ले जीत को बढ़ना होगा

अपने ही दायरे से निकल उभरना होगा
बेइन्तहा भरोसा खुद पे करना होगा
हौसलों के मुताबिक तो ख्वाहिशे खूब
ही चुना की..
ख्वाहिशो के मुताबिक ऐ दिल अब हौसला करना
होगा