बुधवार, 25 अप्रैल 2012

एक बार मिली... ताउम्र..तिश्नगी रही...

तौबा इक निगाह इस कदर बुरी रही..
एक बार मिली... ताउम्र..तिश्नगी रही...


आलोक मेहता...

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