गुरुवार, 26 अप्रैल 2012

अब जहीन हैं हम.. तो एक शिकवे पे याराने टूट जाते हैं...

छुटपन में नादाँ थे जब तक...लड़ते थे फिर मिल जाते थे...
अब जहीन हैं हम.. तो एक शिकवे पे याराने टूट जाते हैं...

आलोक मेहता...

August 20, 2008

5 टिप्‍पणियां:

  1. दो पंक्तियों में कितनी गहरी बात कह डाली आपने... बहुत अच्छी लगी आपकी ये पोस्ट!!

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  2. Oh my gosh.. I just went through some of your creations and i must say all your work is breath takingly beautiful:) Bahut khoob likha hai aapne every word written by you in this divine language Hindi pricks my heart.. Good work :) Keep sharing:)

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    1. Thanks a lot Sonia ji.. For your so nice words of appreciation.... it really feels great to read something like this about my work... and inspires me to write even more. and yes hopefully i'll keep sharing...

      Thanks again

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  3. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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