गुरुवार, 10 नवंबर 2011

चोट फिर भी बेहद गहरी.. लगी हैं मुझको...

तेरा पत्थर चूक गया .. यूँ तो.. मेरे सर का निशाना....
ग़म न कर... चोट फिर भी बेहद गहरी.. लगी हैं मुझको...

..आलोक मेहता...

from old creations... [17.10.2008]

8 टिप्‍पणियां:

  1. तेरा पत्थर चूक गया .. यूँ तो.. मेरे सर का निशाना....
    ग़म न कर... चोट zyada gehri lagi hai mujhko :)

    Bahut hi khoobsoorat hai Aalok

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  2. @ Rashmi prabha ji.. Thik kaha aapne.. Ye to kabhi nahi mit sakti.. Aap aaye behad behad shukriya...


    @ Sanjay Bhaskar ji.. shukriya...


    @ Yogesh ... Bahut Shukriya Yogesh... :)

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