रविवार, 28 सितंबर 2008

तन्हाई उन आँखों की... अब, मेरी भी जिंदगी हर सूं हुई..





आज जो मैं आईने के करीब से गुजर गया
जाने क्यों अक्स देख अपना कुछ सिहर गया
खुद से जो मिली नजरे तो झुक गयी दफतन
जाने क्या था साया तो आँखों में उतर गया ...

शायद मेरी बेवफाई ही आज इस तरह रूबरू हुई...
मोहब्बत याद आई ... जो मेरी वजह .. बेआबरू हुई..
किसी की उठी निगाहें नजर आई मेरी झुकी नजरो में
तन्हाई उन आँखों की... अब, मेरी भी जिंदगी हर सूं हुई..


...आलोक मेहता..








aj jo main aaine k kareeb se yu hi gujar gaya...
jane kyu apna hi aks dekh main kuch sihar gaya...
khud se jo mili to najre jane jhuk gayi yu hi...
jane kya saya tha. jo meri ankho mein utar gaya...

shayad meri wo bewafai hi aj is tarah rubaru hui
mohbbat yaad ayi, jo meri wajah, be-abroo hui...
kisi ki uthi nigahe najar aayi meri juhki najro mein...
tanhai un ankho ki... ab meri bhi jindagi.. har su hui...

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