गुरुवार, 16 अक्तूबर 2008

koi shaks nahi milta...

मेरे दर्द की जुबा यु तो सुनी हैं सभी ने...
समझ सके इसे.. कोई शख्स नहीं मिलता...

आइना-ऐ-दिल का वजूद गुलजार था जिससे
अब मौजूद कही इसमें... वो अक्स नहीं मिलता..

जिसे देखो.. है तैयार वार की खातिर...
तीर तो हैं कई.. कही, कोई तरकश नहीं मिलता...


और मेरा भी हाल तुझसा ही हैं यार मेरे...
मेरी भी आँखों में कुछ... सिवा अश्क नहीं मिलता...

..आलोक मेहता...





mere dard ki juba yu to suni hain sabhi ne...
bas samajh sake isko, koi shaks nahi milta...


mere aina-e-dil ka wajud guljaar tha jis'se
ab isme mujhe kahi wo maujud aks nahi milta...


jise dekho waar karne koi taiyaar hain baitha...
teer to hai kai.. magar kahi koi tarkash nahi milta...

aur mera bhi haal tujhsa hi hain e mere majhi...
meri ankho mein bhi kuch siwa ashk nahi milta...

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