शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

आज इश्क हैं उसे..कल क्या जाने.. क्या तबियत होगी..

Image Courtesy : tooft.com
खैर तू जो न मिले... तो फिर भी जी लेंगे हम...
डर तो ये हैं.. गर हो तू हासिल...क्या सूरत होगी...

मेरे अधूरे ख्वाबो के दरमियाँ क्यूकर हो बसर तेरा
आखिर किस तरह पूरी यहाँ तेरी महलो की जरुरुँत होगी

आज कहती हैं तू... हर हाल साथ निभाएगी मेरा...
फितूर-ऐ-इश्क जो उतरेगा तेरा.. मेरी बड़ी फ़जियत होगी

ऐ-दिल-इ-'आलोक' अच्छा हैं दूर ही चले जाना उसका...
आज इश्क हैं उसे..कल क्या जाने.. क्या तबियत होगी...


...आलोक मेहता...




khair tu jo na mile, to phir bhi ji hi lenge hum..
dar to ye hain.. gar ho tu haasil... kya surat hogi... .


mere adhure khawbo k darmiyan qkar ho basar tera..
akhir kis tarah puri yaha teri mehlo ki jarurat hogi...


aj kehti hain.. har haal mein saath nibhayegi mera...
fitoor-e-ishq jab utrega tera, meri badi fajihat hogi...


e-dil-e-"aalok", accha hain... door hi chale jaana unka...
aaj ishq hain unhe.. kal kya jaane... kya tabiyat hogi....




..aalok mehta...

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