शनिवार, 30 जनवरी 2010

wo kya gaya...meri jindagi, tu to budhi ho gayi...


tujh mein bhi khub shokhi hua karti thi kabhi...
wo kya gaya...meri jindagi, tu to budhi ho gayi...


unke haat se jo giri to dil chir gayi mera...
khanjar se bhi tej tuti hui chudi ho gayi...


na tha pata yu bewajah sadio ke faasle honge
do kadam kya bade...tay milo ki doori ho gayi.


andaja kya rehta ki surat ye dunia kya rahegi...
uski judai bhi is waaste behad jaruri ho gayi...


aalok wo gaya to laga anjaam ko pahuchi...
sadio ki ye jindagi lamho mein hi puri ho gayi...




....Aalok Mehta....


13-01-2010



तुझ में भी क्या खूब शोखी हुआ करती थी कभी
वो क्या गया... मेरी जिंदगी तू तो बूढी हो गयी

उनके हाथ से जो गिरी तो दिल चीर गयी मेरा
खंजर से भी तेज उनकी टूटी हुई चूड़ी हो गयी

न था पता यूँ बेवजह सदियों के फासले होंगे
दो कदम क्या बढे... तय मीलों की दूरी हो गयी

अंदाजा क्या रहता की सूरत-ऐ-दुनिया क्या रहेगी
उसकी जुदाई भी इस वास्ते बेहद जरुरी हो गयी

'आलोक' वो गया तो लगा ये अंजाम को पहुंची
सदियो की जिंदगी... लम्हों में पूरी हो गयी...

...आलोक मेहता..


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