सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

आँख से जो गिरा तो ये अश्क पानी हो जाएगा

आँख से जो गिरा तो ये अश्क पानी हो जाएगा
किस्सा जो दिल में रहा जाहिर जबानी हो जाएगा

निगाहों में पोशीदा रहूँगा जब तक संभालेगी मुझे...
बाहर जो निकला ये वजूद बीती कहानी हो जाएगा

तेरी यादो में जो हूँ.. तो ये हर रोज ही रुलाता हु तुझे....
इस जन्नत से जो निकला.. मेरा गरूर बेमानी हो जाएगा

बरसो रहा शांत की दिल में अपने सैलाब लाख दबाये रहा...
इन्तजार में "आलोक" इक दिन दरिया-ऐ-तूफानी हो जाएगा


..आलोक मेहता..


Ankh se jo gira to ye ashq, paani ho jaayega
kissa jo dil mein raha, jaahir jabani ho jaayega

nigaaho mein poshida rauhnga jab tak sambhalegi mujhe
baahar jo nikla ye wajud beeti kahaani ho jaayega...

teri yaado mein jo hun... to ye har roj hi rulata hain tujhe
is jannat se jo nikla... mera garur bemaani ho jaayega

barso raha shant ki dil mein apne sailaab lakha dabaye raha..
intjaar mein "aalok" ek din..daria-e-tufaani ho jaayega...


..aalok mehta...

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