गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

बेहद आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा...

ऐसे आने से तो बेहतर था.... ना आना तेरा..
जिस्म तो हैं... तेरी रूह को तरसे ये दीवाना तेरा ...

तयशुदा मुलाकातों में वो बात नहीं मिलती..
क्या खूब था राहो में यू ही मिल जाना तेरा...

हर दफा मिलने पर हैं नये ही रंग हैं दिखाती...
जान ले लेता हैं खिजाना तो कभी रिझाना तेरा

हर बार मेरी कोशिश दुरिया ये मिट जाए अपनी...
और हर बार बामक्सद... ये फासले बढ़ाना तेरा...

परी कथा सा था हसी ये ख्वाबो खयालो में...
बेहद आम सा लगा रूबरू मिल जाना तेरा...

मेरे साथ हो कर भी हैं ज़माने की बातें...
यू इशारो इशारो में ये दिल को जलाना तेरा...

आलोक वो न मिली.. तजुर्बा ये खूब रहा फिर भी....
किसी बहाने सही.... उससे जुडा तो ये अफसाना तेरा....


....आलोक मेहता...




Aise aane se to… behtar tha, naa aana tera….
Jism to hain.. teri rooh ko tarse diwana tera…

Tayshuda mulakato mein wo baat nahi milti….
Kya khub tha raaho mein yu hi mil jana tera

Har dafa milne par naye hi rang hain dikhte ….
Jaan le leta hain khijana to kabhi rijhana tera

Har baar meri koshish ki duria ye mit jaaye apni…
Aur har baar bamaksad ye faasle badhana tera…


pari katha sa tha hasi khwabo khayalo mein
behad aam sa laga rubaru yu mil jaana tera..

mere saath hokar bhi hain jamaane ki baatein...
yu isharo isharo mein... ye dil ko jalana tera

wo na mili “aalok” … tajurba khub raha ye bhi…
kisi bahane sahi .. us’se juda to ye afsana tera…


...aalok mehta...


28.04.2010

5 टिप्‍पणियां:

  1. तयशुदा मुलाकातों में वो बात नहीं मिलती..
    क्या खूब था राहो में यू ही मिल जाना तेरा...

    Kya khoob kaha hai bhai...

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  2. आपकी इन रचनाओं में आपके इश्क (किसी से ) की महक आती है....
    ऐसा कुछ है क्या मेहता साहब ??
    बहुत उम्दा लेखन, जवाब नहीं !!!
    शुक्रिया !!

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  3. Tapesh ji... talaash jaari hain... koi apki najro mein ho to bataiyega.....

    on a serious note... aap blog par aaye.. aur itni saraahna ki.. behad aabhari hu... aage bhi sath banaye rakhenge ummeed karta hu...

    :)

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