शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

सच..ख्वाब इस हकीकत से कही बेहतर थे...

तादाद में भले ही कमतर थे
ख्वाब इस हकीकत से बेहतर थे...

उम्मीदों की जमी बंजर ही रही...
फिर न फले जो हौसलों क शजर थे

उम्र भर किया इन्तजार जिनका..
पल वो ख्यालो से बेहद सिफ़र थे...

वो मिलेगा...सोचा...तकदीरे बदलेगी...
वो मिला..तो भी.... दर बदर थे...

उसके मुताबिक मंजिले चुनते गए...
वो गया तो लगा 'अजनबी सफ़र' थे...

सच न होते... तो ताउम्र साथ तो रहते...
सच..ख्वाब इस हकीकत से कही बेहतर थे...

...आलोक मेहता...


taadad mein bhale hi kamtar the
khwab is hakikat se behtar the...

umeedo ki jami banjar hi rahi...
phr na phale hauslo k jo shajar the..

umr bhar kiya intjaar jinka....
pal wo khyalo se sifar the...

wo milega... socha... takdeere badlegi...
wo mila... to bhi... dar badar the...


uske mutabik manjile chunte gaye..
wo gaya to laga..'ajnabi safar' the...

sach na hote..to taumr sath to rehte...
sach... khwab is hakikat se kahi behtar the...

..aalok mehta...

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