मंगलवार, 30 नवंबर 2010

teri hi darkaar hain...

hosle se haar jaati hain muskile yu to mere yaar...
hosla dene ko bhi magar teri hi darkaar hain...

... Alok Mehta...

1 टिप्पणी:

  1. कुछ पंक्तियाँ याद आ गयी

    "यूँ तो मैं अकेला गिर कर भी संभल सकता हूँ
    तू अगर साथ दे तो दुनिया भी बदल सकता हूँ"

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