मंगलवार, 11 जनवरी 2011

हाँ वो मेरी ही कहानी थी...


हो जाना था जिसमे मेरा तुझको....
जिसमे जिंदगी हमे संग बितानी थी...
अफसाना था वो मेरा ही..
हाँ वो मेरी ही कहानी थी...

तेरी राहे न होनी थी जुदा...
मंजिल संग जिसमे पानी थी
अफसाना था वो मेरा ही
हा वो मेरी ही कहानी थी

झूठ से परे सच रहना था...
मुक्तसर जिसमे हर बात रह जानी थी...
अफसाना था वो मेरा ही
हा वो मेरी ही कहानी थी

इन्तजार जिसमे कभी लिखा न था...
आहट को जिसमे नजरे न लगानी थी..
अफसाना था वो मेरा ही
हा वो मेरी ही कहानी थी

मगर तू न मिल सका मुझको...
उम्र तनहा जिसमे बितानी थी ....
अफसाना था वो मेरा ही
हा वो मेरी ही कहानी थी ...
aalok mehta

2 टिप्‍पणियां:

  1. Too good...
    But, so many lines were being repeated


    haan vo mera hi afsaana tha
    haan vo meri hi kahani thi...

    You could have changed the third line to soemthing else ending in the same rhyme...

    Take examples of some songs...

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  2. that was the whole idea.. to repeat the 3rd and 4th line of first verse in every verse following it.. and only changing the first and 2nd line...


    isko isi format mein likhne ka man hua...

    songs mein.. jyadatar sirf 4th line constant hoti hain hoti hain... aur 3rd line rhyme karayi jati hain...

    next time i'll write differently...

    thanks for the views buddy...

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