बुधवार, 19 जनवरी 2011

नहीं आती कहनी रूमानी बातें...

मुझे कहाँ आती हैं कहनी...
ख्वाबो की सुहानी बातें
मुझ से तो रूठी रहती हैं
सारी ही पुरानी बातें..
मुझमें कहा हैं हुनर
कह पाऊं जुबानी बातें
मुझे.. तो सिर्फ उल्फत हैं...
नहीं आती कहनी रूमानी बातें...

...आलोक मेहता...

4 टिप्‍पणियां:

  1. मैं नहीं कह पाया कभी
    कुछ अपनी कुछ अनजानी बातें
    तुम क्या कोई गेर हो
    तुमको क्या समझनी बातें


    बहुत प्यारी बातें कहीं हैं आपने

    उत्तर देंहटाएं
  2. Shukriya Shephali ji...

    aapki panktiyo ko apne andaaj mein likhna chaha hain...



    main nahi keh paya kabhi
    kuch apni anjaani baatein
    par tum gair nahi koi..
    phr tumko kya samjhani batein...

    उत्तर देंहटाएं