गुरुवार, 6 जनवरी 2011

गर ये जिद न होती तो... जिंदगी कितनी मुश्किल होती.. नहीं!

बिछड़ते वक़्त ख्वाइश थी तेरी, कि भूल जाऊ मैं तुझको...
और मैं कर रहा था जिद तुझे ता-उम्र याद रखने की....


अब सोचता हूँ ... गर ये जिद न होती तो... जिंदगी कितनी मुश्किल होती.. नहीं!


...आलोक मेहता...






bichadte waqt khwaish thi teri, ki bhul jaata main tujhko...
aur main kar raha tha jid ta-umr tujhe yaad rakhne ki...

ab sochta hu.. gar ye jid na hoti to jindagi kitni mushkil hoti ... nahi!....

......aalok mehta...

1 टिप्पणी:

  1. कभी कभी किसी की यादें ज़िन्दगी को आसान बना देती हैं
    दिल को छूने वाली रचना

    आपका मेरे ब्लॉग http://wordsbymeforme.blogspot.com/ pe स्वागत है

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