मंगलवार, 11 जनवरी 2011

सोचता हूँ मैं....


(Image Courtesy :- Google Images)

सोचता हूँ मैं....
तेरी राह कभी मेरी राहो से जुड़ जायेंगी
कभी तो होगा जब तू भी मुझे चाहेगी....
खयालो से इतर हकीकत में मिलेगी मुझसे
ख्वाबो के सिवा निगाहों में रोशन हो जायेगी...


सोचता हूँ मैं.
यु ही कही किसी सूरत जो तू मिल जायेगी
निगाहें मिले.. निगाहें निगाहों में रह जायेगी...
न होंगी अजनबी हिचकिचाहट बर्ताव में...
एक अनजानी कशिश दरमियाँ रवां हो जायेगी

सोचता हूँ मैं...
यु तो असलियत से परे तू मिल जायेगी...
मगर असल जिंदगी में क्या वजूद पाएगी....
कल्पनाओं के धरातल पे उकेरी जो सूरत ...
वास्तविकता की जमीन पे क्या शक्ल पाएगी..



...आलोक मेहता..

2 टिप्‍पणियां:

  1. sorry apko bura na lage to main apke last stanga ki editing kr ke apne soach se likha hai:सोचता हूँ मैं...अगर
    तू असलियत से परे तू मिल जायेगी...
    असल जिंदगी में मेरा वजूद पाएगी....
    कल्पनाओं के धरातल पे उकेरी जो सूरत
    वास्तविकता की जमीन में वो मेरे प्यार की शक्ल पाएगी..
    kaisa laga? waise ap acha likhte hai.....:)

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  2. priyanka ji... kaafi positive likha hain aapne... accha laga...


    hausla afzzai ke liye apka shukriya....

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