बुधवार, 12 जनवरी 2011

फिर वही हैं तन्हाईयाँ.. फिर ये मन उदास है..



{Image courtesy :- voiceinrecovery.wordpress.com)

ख्वाब देखता हूँ मैं.. कि, वो फिर मेरे यूँ पास हैं ..
खिल गया मेरा ये मन, उम्मीदों को मिली परवाज़ हैं
पर आंख खुली जो मेरी.. फिर वही एहसास हैं...
फिर वही हैं तन्हाईयाँ.. फिर ये मन उदास है..


Khwab dekhta hun main.. ki, wo phir mere yun paas hain.
khil gaya mera ye man.. ummeedo ko mili parwaaz hain..
par aankh khuli jo meri.. phir wahi ehsaas hain..
phir wahi hain tanhaiyan.. phir ye man udaas hain...


..aalok mehta...

(from my old collection)

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