गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

कल ऐतवार हैं.... उफ़!!! फिर से !

कल ऐतवार हैं
उफ़!!! फिर से !

कैसे कटेगा फिर से ये..
कितनी मुश्किल से कटा था पिछला वाला
कितना सताया था तुमने...

हफ्ते भर को तो
किसी तरह से
काट लेता हूँ
काम तो कभी
मसरूफियत का बहाना लेकर
मगर
छुट्टी के दिन.. कमबख्त,
कोई काम भी तो नहीं होता
मुझे थोडा सा फ्री देख कर
तुम आ जाती हो

काटे नहीं कटता फिर तो वक़्त
जाने कैसे
अपने पल्लू से
बाँध लेती
हो इसे

मैं बेचैन रहता हूँ
तमाम वक़्त...

दोस्तों के दरमियाँ भी, बस
तुम्ही साथ
होती हो
उनकी भी शिकायत
"जनाब!
इन्हें क्यों साथ ले आये "

मगर तुम्हारे सामने कहा
चलती है मेरी...
कहाँ मानती हो
तुम..

क्या करू...
कि
कैसे बीतेगा
कल का दिन


तुम फिर सताओगी
मनमानी करोगी
छेड़ोगी मुझे
शैतानी करोगी ...
और मैं कहूँगा..
कि बीत जाए
ये मुआ!
दिन किसी तरह

फिर रात आ जाएगी...
और फिर इसके साथ तुम
भी चली जाओगी..
और रह जाएगा...
फिर से...
वही एक हफ्ता बिताने के लिए,
तुम्हारे बगैर!
जो तुम्हारे जाने के बाद
और मुश्किल हो जाता हैं
बिताना

क्या करू???
कल ऐतवार हैं....

मगर सच कहू..

कनखियों से मैं भी
इसके आने कि राह तकता हूँ...

तो.. देखो..
तुम भूल ना जाना...

कल ऐतवार हैं...

उफ़!
मगर फिर से!!!

..आलोक मेहता...


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kal aitwaar hain... ..
uff fir se!!!

kaise katega phir...
kitni mushkil se kata tha phichla wala..
kitna sataya tha tumne...
hafte bhar ko to kisi tarah se
kaat leta hu..
kaam ki oat lekar
to..kabhi masrufiyat ka bahana
lekar...
magar chutti k din kambakht
koi kaam bhi to nahi hota
mujhe thoda free dekh kar
tum aa jati ho
kaate nahi kata'ta fir waqt
jane kaise apne pallu
mein bandh leti ho ise
main bechain rehta hu
tamam waqt..
dosto k darmiyaan bhi
bas tumhi sath hoti ho
unki bhi shikayat, " janab!
inhe kyu sath le aaye"
magar tumhare samne
meri kaha chalti hain...
kaha maanti ho tum
kya karu..
ki kaise bitega kal ka din...
tum phir sataogi
manmani karogi
chedogi mujhe
shaitaani karogi..
aur main kahunga
ki beet jaaye
ye muaa din kisi tarah…
fir raat aa jayegi…
aur fir iske saath
tum bhi chali jaogi..
aur reh jayega
fir se
wahi ek hafta bitane ko
tumhare bagair..
jo tumhare jane ke baad
aur mushkil ho jata hain
bitaana...

kya karu
kal aitwaar hain...

magar sach batau...
kankhiyo se
main bhi iske aane
ki aahat takta hu..


to dekho tum bhul na jana...


Kal aitwaar hain....

uff.. magar fir se...
:)


...aalok mehta...

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