शनिवार, 30 अप्रैल 2011

न निभा सकेंगे हम.. गर तुझे शुबा रहा...

गर तुझे शुबा रहा.... क्या निभा सकेंगे हम
न निभा सकेंगे हम.. गर तुझे शुबा रहा...

...आलोक मेहता...

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