मंगलवार, 10 मई 2011

वो आया सफ़र में.. और हैरान कर गया...




अपने याद आने का सामान कर गया ..
जाते वक़्त वो ये एहसान कर गया ..

मैं तो गुजर ही जाता बीते लम्हों कि तरह...
वो आया, मुझे एक दास्तान कर गया

हमसफ़र न कोई होगा.. सोच गुम था मैं...
वो आया सफ़र में.. और हैरान कर गया...

..आलोक मेहता...

5 टिप्‍पणियां:

  1. हमसफ़र न कोई होगा.. सोच गुम था मैं...
    वो आया सफ़र में.. और हैरान कर गया...kya kahu bhut hi accha aur gajab kar likha hai apne...

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  2. prashansa ko shabd nahi hai mere paas......

    aur yu aaya ek hawa ka jhonka,
    ki mujhe bhi kisi ki zindagi ka ek armaan kar gaya

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  3. Shukriya Sneha ji... aur apne jo panktiya likhi wo bhi khub hain...

    "mujhe bhi kisi ka armaan kar gaya..."
    acchi lagai ye lines...

    shukriya..

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  4. दिल को छु गयी ये रचना

    लिखते रहिये

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