बुधवार, 25 मई 2011

निगाहों निगाहों सवाल करना... सुनना खुद को जवाबो में...

निगाहों निगाहों सवाल करना...
सुनना खुद को जवाबो में...
इश्क अपना वैसा हैं..
पढ़ा था जैसा किताबो में...

आलोक मेहता...

2 टिप्‍पणियां:

  1. अब किताबों सा इश्क मिलता कहाँ है
    हाँ एक जगह है
    किताबें........

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  2. सही कहा शेफाली जी .. किताबो सा इश्क तो बस अब किताबो में ही मिलता हैं...

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