गुरुवार, 25 अगस्त 2011

अभी..उल्फत की शुरुआत हैं...

वो मुझसे, मैं उससे ... हर मुलाक़ात पे उलझ जाता हूँ...
वो हुस्न हैं.. मैं इश्क हु... और अभी..उल्फत की शुरुआत हैं...

आलोक मेहता...

wo mujhse main us'se har mulakaat par ulajh jaata hu....
wo husn hain main ishq hu.. aur abhi ulfat ki shuruaat hain...

aalok mehta...

2 टिप्‍पणियां:

  1. कम शब्दों में
    बहुत सुन्दर रचना । आभार
    ढेर सारी शुभकामनायें.
    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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