गुरुवार, 1 सितंबर 2011

इन्टरनेट चैट लिस्ट



नाम.. लोग.. चेहरे...
कितने नजर आते हैं..
सुचना क्रांति के
संवाहक..इस इन्टरनेट पे...
फेसबुक की चैट लिस्ट में
या गूगल टॉक पे
कुछ available... कुछ बिजी ...
और कुछ यु ही ... idle ..
अलग अलग status मेसेज के
साथ
आपको खुद से बात करने का
निमंत्रण देते हुए
शहर की भीड़ में तनहा
कर दिए गए आपके वजूद को
एक झूठा दिलासा सा देते
हुए या फिर
यू कहे आपको एक तरह
से चिढाते हुए...
कि कोई हक नहीं हैं
तुम्हे तनहा महसूस करने का
जबकि एक क्षण भी
तुम्हे तन्हाई का
एक मौका भी नसीब नहीं
और
घबरा कर.. हिचकिचा कर
आप चाहते हैं ..
कि किसी से बात करे
और करते भी हैं
और विडंबना हैं कि
बातें ही होती भी हैं
कोरी बातें....
जो आपको जुखाम में
instant coffee
जैसी थोड़ी राहत तो देती हैं....
मगर माँ के अदरक के काढ़े
जैसा स्थायी आराम नहीं...
वैसे कई रिश्ते भी बन जाते हैं
"can we be फ्रेंड?" से
तरक्की कर कुछ तो
"will u marry me ?"
तक भी पहुच जाते हैं...
तो कुछ की रियल लाइफ
relationship भी बस
net buddies तक ही
सीमित रह जाती हैं...
मिलो दूर बैठे लोगो
की छोटी छोटी बातों
का हिसाब हम रखते हैं
और जो लोग पास हैं...
जो कि सच में हमे
इस तन्हाई से बाहर निकाल
सकते हैं...
उनकी जरूरतों.. उनके एहसासों
से बेखबर रहते हैं...
बड़ा ही अद्भुत संसार हैं
ये इन्टरनेट chatting का
हर वक़्त हर पल..
आपके पास कोई
मित्र हाज़िर हैं... आपसे
बात करने को....
आपका सुखदुख बाँटने को..
मगर क्या सच में.....
शायद ये सच भी हो...
लेकिन एक दूसरे के संपर्क
में रहने का एक माध्यम
उन लोगो के साथ
अब एक एकमात्र संपर्क
रह गया हैं
कुछ लोगो के लिए....
जो कभी परस्पर
संवाद के लिए
एक विकल्प
बन के आया था
धीरे धीरे एकमात्र विकल्प
बनता जा रहा हैं...
हैं ना ?

...आलोक मेहता...

01.09.2011... 2.45 PM

5 टिप्‍पणियां:

  1. I am first time in your blog.
    first of all congratulations for nice poem.

    You are always welcome in my blog.
    http://ghazalyatra.blogspot.com/
    http://varshasingh1.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. Varsha ji... Thanks a lot for visiting the blog and appreciating it.

    and also for giving me the opportunity to get familiar with ur work...

    उत्तर देंहटाएं
  3. ab shayari ko work mat kaho yaar...

    work sun ke lagta hai bojh ho jaise :P

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  4. जो आपको जुखाम में
    instant coffee
    जैसी थोड़ी राहत तो देती हैं....
    मगर माँ के अदरक के काढ़े
    जैसा स्थायी आराम नहीं...


    vry true
    ye jo internet pe bane relations hote hain wo aise hi hote hain shayad
    hazar naam
    bas naam hi

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