गुरुवार, 22 सितंबर 2011

'गुमनामियाँ' इक दिन.. उसकी 'शौहरत' होगी...


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ज़माने संभाल रख.. कि.. फिर जरुरत होगी..
मैं उठूँगा .. तो फिर.. गिराने की हसरत होगी...

ये हौसला न चुकेगा... रहेगा यु ही ताउम्र...
जाएगा जब जां... जिस्म से रुखसत होगी..

लौट आया हैं.. या.. फिर हैं कोई शगल उसका...
फलेगी या...फिर इक दफा रुसवा मोहब्बत होगी...

रोकना क्या.. धीमा तक न मुझे कर पाएगी...
टकराए मुझसे.. क्या... कूबत-ऐ-क़यामत होगी...

वास्ता क्या... 'आलोक' को रंगीनियो से तेरी...
'गुमनामियाँ' इक दिन.. उसकी 'शौहरत' होगी...

...आलोक मेहता...

3 टिप्‍पणियां:

  1. ज़माने संभाल रख.. कि.. फिर जरुरत होगी..
    मैं उठूँगा .. तो फिर.. गिराने की हसरत होगी...bhaut hi acchi rachna..

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  2. @ sushma 'aahuti' ji.... behad Shukriya...

    @ Shephali ji.... aabhaar...

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