सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

दुआ-सलाम कर लौटने का.... फिर न रस्ता रखना...

यक-ब-यक ही जाना ..जब जाना तुम.. जिंदगी से मेरी...
दुआ-सलाम कर लौटने का.... फिर न रस्ता रखना...


आलोक मेहता...

5 टिप्‍पणियां:

  1. जब साथ ही छूट गया तो क्या रास्ता देखना ..पर फिर भी एक उम्मीद ना जाने क्यूँ रहती है

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    1. usi ummeed k chalte to naye rishto mein wo gehraayi nahi aa paati... to behtar hain ki ummeed hi na rahe... aur dono hi nayi shuraat kar sake...

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