बात चुभती हो कोई... तो चलो बात करे...

अब आज अभी से इक नयी शुरुआत करे....
बात चुभती हो कोई... तो चलो बात करे...
दूर तक चलना शिकवो का भी ठीक नहीं...
मिटा दे चलो इन्हें... ख़त्म मामलात करे...
था करार सदियों का ...लम्हों भी चला न वो...
जवाब मांगे भी तो क्या... क्या सवालात करे...
क्या रहेंगे गिले.. जो रूबरू हो पाए हम....
"आलोक" मुझसे गर कहे ... जो औरो से तू बात करे....
आलोक मेहता...
था करार सदियों का ...लम्हों भी चला न वो...
जवाब देंहटाएंजवाब मांगे भी तो क्या... क्या सवालात करे...
सच कहा...अच्छी रचना..
नीरज
मन को छू लेने वाली रचना...
जवाब देंहटाएं"गिले शिकवे तक़दीर से, बातेँ पुरानी हो चली
मुकम्मल हो मुमकिन, आज कुछ ऐसे हालात करेँ"
umda sher hain sneha ji.. thoda sa modify kiya hain... ab shayad jyada appropriate lage... :)
जवाब देंहटाएं"गिले शिकवे तक़दीर से, बातें अधूरी सब रह चली
मुकम्मल हो अब मुमकिन, कुछ ऐसे हालात करेँ"
वाह जी सुंदर
जवाब देंहटाएंShukriyaa.. Kumar sahab
हटाएंवाह...............
जवाब देंहटाएंबेहतरीन गज़ल...सुन्दर शेर.....
अनु
बेहद शुक्रिया अनु जी...
हटाएंइतना अच्छा लिखते हैं.... लिखना क्यों छोड़ दिया
जवाब देंहटाएं