मंगलवार, 11 अगस्त 2009

मैं चल पड़ता हूँ उन्ही रास्तो पर अक्सर....

मैं चल पड़ता हूँ, उन्ही रास्तो पर अक्सर....
जमाना बताता जिन्हें... हौसलों की जद में नहीं


होती हैं उन्ही मंजिलो की चाह ही मुझको
कही जाती हैं जो मेरे इरादों की हद में नहीं ...

किसी के सुझाये रास्तो पर चलना कब गवारा हुआ
बनी बनायीं राहो पर चलना अपनी तो फितरत नहीं

बढ़ पड़ते हैं अनछुई मंजिलो की जानिब कदम
जो पा लिए गए उन मकामो की कोई चाहत नहीं

हौसलों से पाया जो... जिंदगी का एक कतरा बहुत हैं
खैरात में मिले तो कुछ औकात-ऐ-जन्नत नहीं

अपनी ही कारगुजारियो से यार नाम हो काफी हैं
किसी और की शौहरत जाने की कोई हसरत नहीं

वादा कब किया था की अव्वल आ ही जाऊँगा
बूँद की कोशिश कर समंदर पाने की कोई गफलत नहीं

अपने दम पर जो मिली "आलोक" वो हार भी अनमोल हैं
किसी और के भरोसे जो मिले उस जीत की कोई कीमत नहीं

...आलोक मेहता ...

4 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khubsurat alfaz hai............mere khyalo se milte julte

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  2. Waw u r great .......... Meri duaye aapke sath h ......kisi bejuban ki aawaj ho, suro me sartaj ho...... Kuda jamen me h ...... Or aap aasman ke sartaj me ho.....

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